Bas Chand Mulakatein || GulaN-P || Gulshan Kumar
Bas Chand Mulakatein
Written By - GulaN-P
बस चंद मुलाकातें काफी है
तुमसे दिल लगाने को
वो शामें और काली रातें काफी है
खुदको तुमसे मिलाने को
कितना आसान था ना उस वक़्त कहना
इसका आज अफ़सोस हो रहा है
शायद ग़लत होकर भी सही थे
तेरी बातों को मेरे अहसासों से मिलाने को
मैं थोड़ा घबराया सा था
और तू भी मायूस सी बैठी थी
जैसे मैं सूखी ज़मीन सा
और तू काले बादलों सा आसमान मुझपे
मेरी ख़ामोशीया बहुत कुछ कह रही थीं
पर तु समझ न पायी मेरे दिल दीवाने को
ख़ैर छोड़ो जो भी हुआ उस वक़्त
शायद हमारे दिमाग मे उस समय बचपना था
खुशी बस इस बात की है कि
तू आज भी क़रीब है
मेरे आँसुओ को मिटाने को।
- गुलशन कुमार
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Written By - GulaN-P
बस चंद मुलाकातें काफी है
तुमसे दिल लगाने को
वो शामें और काली रातें काफी है
खुदको तुमसे मिलाने को
कितना आसान था ना उस वक़्त कहना
इसका आज अफ़सोस हो रहा है
शायद ग़लत होकर भी सही थे
तेरी बातों को मेरे अहसासों से मिलाने को
मैं थोड़ा घबराया सा था
और तू भी मायूस सी बैठी थी
जैसे मैं सूखी ज़मीन सा
और तू काले बादलों सा आसमान मुझपे
मेरी ख़ामोशीया बहुत कुछ कह रही थीं
पर तु समझ न पायी मेरे दिल दीवाने को
ख़ैर छोड़ो जो भी हुआ उस वक़्त
शायद हमारे दिमाग मे उस समय बचपना था
खुशी बस इस बात की है कि
तू आज भी क़रीब है
मेरे आँसुओ को मिटाने को।
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